विश्वनाथ आश्रम का द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर वर्षों से आस्था का केंद्र

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अरविंद विश्वकर्मा

वाराणसी। पंचक्रोशी परिक्रमा के चतुर्थ पड़ाव शिवपुर के गिलट बाजार स्थित श्रीविश्वनाथ आश्रम का द्वादश ज्योतिर्लिंग शिव मंदिर करीब 200 वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित इस प्राचीन मंदिर में वर्षभर देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता है कि यहां एक ही स्थान पर द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने से देश के विभिन्न तीर्थस्थलों पर स्थित बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का पुण्य प्राप्त होता है।

*200 वर्ष पुराना है इतिहास*

बताया जाता है कि करीब दो शताब्दी पूर्व आचार्य महामंडलेश्वर जयेंद्रपुरी महाराज, गोविंद मठ के द्वारा श्रीविश्वनाथ आश्रम में द्वादश ज्योतिर्लिंग शिव मंदिर की स्थापना कराई गई थी। स्थापना के समय देशभर से विद्वानों और संत-महंतों को आमंत्रित किया गया था। धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों की स्थापना हुई।मान्यता है कि इस धार्मिक आयोजन के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र से अभिसिंचित 11 करोड़ बिल्व पत्र भगवान शिव को अर्पित किए गए थे। देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए संतों, महंतों और विद्वानों की मौजूदगी में हुए इस आयोजन ने मंदिर की आध्यात्मिक महत्ता को और बढ़ाया।

*एक परिसर में बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन*

मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता एक ही परिसर में द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन होना है। धार्मिक मान्यता के कारण दूर-दराज से श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान शिव की आराधना करते हैं। भक्त मनोकामना पूर्ति, परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य, संतान और समृद्धि के लिए पूजा-अर्चना करते हैं। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार मंदिर में चढ़ावा भी अर्पित करते हैं।

*सावन और महाशिवरात्रि में उमड़ती है भीड़*

कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित होने के कारण सावन में मंदिर का महत्व और बढ़ जाता है। कांवड़िये और स्थानीय श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। महाशिवरात्रि पर भी विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। इस दौरान सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की कतार लगने लगती है। वर्षभर यहां विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होते रहते हैं।

*गोविंद मठ करता है संचालन*

श्रीविश्वनाथ आश्रम और मंदिर का संचालन टेढ़ीनीम स्थित गोविंद मठ द्वारा किया जाता है। आश्रम में धार्मिक गतिविधियों के साथ समय-समय पर विभिन्न अनुष्ठान भी होते हैं। विश्वनाथ आश्रम भंडारा समिति के अध्यक्ष डॉ. ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह ‘डीडी’ ने बताया कि द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर प्राचीन समय से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। सावन और महाशिवरात्रि में यहां बड़ी संख्या में भक्त दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर के पुजारी आचार्य श्री राममणि शर्मा ने बताया कि पंचक्रोशी परिक्रमा में शिवपुर का विशेष धार्मिक महत्व है। श्रीविश्वनाथ आश्रम का द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी महत्वपूर्ण आस्था स्थल है। करीब दो सौ वर्षों से आस्था का केंद्र बना यह मंदिर काशी की समृद्ध धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा को आज भी जीवंत रखे हुए है।


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