‘जुड़वां भाई’ में प्रेमचंद ने उकेरा व्यक्तित्व और जीवन-दृष्टि का अंतर

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वाराणसी। प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र लमही की ओर से प्रेमचंद की स्मृति में चल रहे ‘सुनो मैं प्रेमचंद’ कार्यक्रम के 2021वें दिवस पर रविवार को कहानी ‘जुड़वां भाई’ का पाठ किया गया। डॉ. संजय कुमार श्रीवास्तव ने कहानी का पाठ किया। इसके बाद ट्रस्ट के संरक्षक प्रो. श्रद्धानंद और निदेशक राजीव गोंड ने उन्हें सम्मानित किया।कहानी की समीक्षा करते हुए प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि प्रेमचंद की भाषा सहज, सरल और प्रभावशाली है। वह कठिन साहित्यिक शब्दावली के बजाय बोलचाल की भाषा का प्रयोग करते हैं। उनके संवाद पात्रों को स्वाभाविक बनाते हैं और कथा में गति पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि ‘जुड़वां’ शब्द बाहरी समानता का संकेत देता है, लेकिन कहानी में दोनों भाइयों के व्यक्तित्व और जीवन-दृष्टि में अंतर इस समानता को चुनौती देता है। यही विरोधाभास कहानी के मूल विचार को प्रभावशाली ढंग से सामने लाता है।कार्यक्रम के आरंभ में प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित की गई। साहित्यप्रेमियों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। संचालन आयुषी दूबे ने किया। स्वागत राहुल यादव तथा धन्यवाद व्यंग्यकार सूर्यदीप कुशवाहा और विपनेश सिंह ने किया।

इस अवसर पर अनिल कुमार श्रीवास्तव, सुनील कुमार, नमन श्रीवास्तव, रोहित गुप्ता, समीक्षा त्रिपाठी, मनोज श्रीवास्तव, विवेक विश्वकर्मा, राजेश प्रसाद, आनंद आदि मौजूद रहे।


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