प्रेमचंद के साहित्य में सामाजिक संवेदना और राष्ट्रीय चेतना को किया याद

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वाराणसी। वसंत कन्या महाविद्यालय में हिंदी विभाग की ओर से प्रेमचंद की रचनाओं के रूपांतरण की तकनीक एवं पाठ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विशिष्ट अतिथि प्रेमचंद पथ पत्रिका के संपादक राजीव गौड़ ने प्रेमचंद की कहानियों, उनके अनुवाद और साहित्यिक महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर डॉ. कमला पाण्डेय की पुस्तक स्तक देशस्य आक्रांतः का लोकार्पण हुआ। यह पुस्तक ब्रिटिश शासन द्वारा जब्त की गई प्रेमचंद की कहानी सोज-ए-वतन का संस्कृत अनुवाद है। हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. आशा यादव द्वारा संपादित पुस्तक उत्तरशती के विमर्श, धर्म, समाज एवं मूल्यबोध का भी लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में प्रेमचंद की कहानियों के रूपांतरण की तकनीक पर चर्चा हुई। डॉ. अनुराधा बनर्जी ने जुर्माना कहानी के नाट्य रूपांतरण का भावपूर्ण पाठ प्रस्तुत किया। वक्ताओं ने प्रेमचंद के साहित्य में हाशिए के समाज के प्रति संवेदनशीलता और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। प्राचार्य प्रो. रचना श्रीवास्तव ने छात्राओं को प्रेमचंद की रचनाओं के अध्ययन के लिए प्रेरित किया। संचालन डॉ. प्रीति विश्वकर्मा तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो. आशा यादव ने किया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के शिक्षक एवं छात्राएं मौजूद रहीं।


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