नेपाल में हाई अलर्ट, 3 दिन में दूसरी भीषण बाढ़ का खतरा

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तिब्बत में झील फटने से मचा हड़कंप, रसुवा में रेस्क्यू रोका गया!

काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ के तीसरे दिन एक बार फिर बड़ी तबाही का खतरा मंडरा रहा है। बुधवार को ग्लेशियर/बर्फ-पत्थर के बड़े मलबे के खिसकने से भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के रसुवा समेत कई इलाकों में भारी तबाही मचाई थी। अब शुक्रवार को तिब्बत की ओर एक कृत्रिम/भूस्खलन से बनी झील के ओवरफ्लो होने और बांध के टूटने की सूचना के बाद नेपाल में दूसरी भीषण बाढ़ की आशंका पैदा हो गई है। नेपाल पुलिस और आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदी के किनारे बसे इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया है। रसुवा और नुवाकोट में विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। बचाव एवं राहत कार्य में लगे सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय लोगों को तत्काल सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।

“तीसरे दिन भी शवों की तलाश जारी”

26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर से जुड़े एक बड़े बर्फ-पत्थर मलबे के खिसकने के बाद अचानक पानी और मलबे का सैलाब भोटेकोशी नदी में उतर गया। देखते ही देखते नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया और रास्ते में आने वाले पुल, सड़कें, इमारतें, हाइड्रोपावर परियोजनाएं और कई अन्य ढांचे तबाह हो गए। वैज्ञानिकों के शुरुआती आकलन के मुताबिक मलबे ने ल्हेंदे नदी को अस्थायी रूप से रोककर एक झील जैसी स्थिति बनाई और उसके बाद अवरोध टूटने से अचानक बाढ़ आई। आपदा के तीसरे दिन भी प्रभावित क्षेत्रों में तलाशी अभियान जारी है। कीचड़, पत्थरों और मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश की जा रही है। नेपाल में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है और बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार नेपाल और तिब्बत में मिलाकर 1,500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं।

“अब दूसरी बाढ़ का खतरा क्यों?”

पहली बाढ़ के बाद सीमा क्षेत्र में भारी मात्रा में मलबा जमा हो गया है। इसी दौरान तिब्बत की ओर भूस्खलन से बनी एक बड़ी झील में पानी का स्तर बढ़ता गया। शुक्रवार को झील के ओवरफ्लो होने की सूचना मिली, जिसके बाद आशंका बढ़ गई कि अतिरिक्त पानी नीचे की ओर तेजी से बह सकता है।रिपोर्टों के मुताबिक झील में करीब 25 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका है। पानी का लगातार बढ़ना आसपास के इलाकों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। यही वजह है कि नेपाल के अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को बेहद सतर्क रहने और खतरा महसूस होने पर तत्काल ऊंचे स्थानों पर जाने को कहा है।

“रसुवा में रेस्क्यू ऑपरेशन अस्थायी रूप से रोका गया”

नई बाढ़ की आशंका का सीधा असर राहत और बचाव अभियान पर भी पड़ा है। रसुवा जिले में शुक्रवार को झील के ओवरफ्लो होने की खबर के बाद बचाव अभियान को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। हेलीकॉप्टर से चलाए जा रहे रेस्क्यू मिशन भी सुरक्षा कारणों से प्रभावित हुए। अधिकारियों ने बचावकर्मियों को अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देने और सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए। आपदा क्षेत्र में पहले से ही हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हैं। कई सड़कें और पुल बह चुके हैं, जिससे प्रभावित इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। मलबे और तेज बहाव के कारण जमीन पर चलाया जा रहा अभियान भी जोखिम भरा बना हुआ है।

“सैकड़ों मौतें, हजारों लोग लापता”

बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नेपाल में मृतकों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार की ताजा रिपोर्टों में नेपाल में 469 मौतों की पुष्टि की गई है, जबकि नेपाल और तिब्बत में मिलाकर करीब 1,500 लोग लापता बताए गए हैं। तिब्बत के जिरोंग काउंटी में भी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। प्रभावित लोगों में स्थानीय नागरिकों के साथ विदेशी नागरिक और पर्यटक भी शामिल हैं। सीमा क्षेत्र काठमांडू और ल्हासा के बीच महत्वपूर्ण मार्ग होने के कारण बड़ी संख्या में यात्री और पर्यटक इस आपदा की चपेट में आए हैं।

“हाइड्रोपावर और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान”

भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ ने नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई पुल और सड़कें बह गईं। हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचने की खबर है। बिजली उत्पादन और परिवहन व्यवस्था पर इसका असर पड़ने की आशंका है।बाढ़ का पानी अपने साथ बड़े-बड़े पत्थर, पेड़ और मलबा लेकर आया, जिसने नदी के आसपास मौजूद ढांचों को अपनी चपेट में ले लिया। कई स्थानों पर पूरा इलाका कीचड़ और मलबे में तब्दील हो गया है।

“नेपाल में हाई अलर्ट”

दूसरी संभावित बाढ़ को देखते हुए नेपाल पुलिस और आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने भोटेकोशी तथा त्रिशूली नदी के किनारे रहने वाले लोगों को अलर्ट किया है। प्रशासन की कोशिश है कि पहली आपदा से प्रभावित लोगों को दूसरी बाढ़ की चपेट में आने से बचाया जा सके। अधिकारियों ने साफ किया है कि मौजूदा परिस्थितियों में नदी किनारे या निचले इलाकों में रुकना जोखिम भरा हो सकता है। बचाव दलों को भी मौसम और जलस्तर की स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

“हिमालयी क्षेत्र में बढ़ता खतरा”

इस आपदा ने हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर, भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ के बढ़ते खतरे को एक बार फिर सामने ला दिया है। वैज्ञानिक अभी इस घटना के सटीक कारणों का अध्ययन कर रहे हैं। शुरुआती विश्लेषण में ग्लेशियर से जुड़े बर्फ-पत्थर के मलबे और उसके बाद नदी में बने अस्थायी अवरोध के टूटने को बाढ़ का संभावित कारण माना जा रहा है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती है—लापता लोगों की तलाश, प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालना और दूसरी संभावित बाढ़ से जान-माल को बचाना। नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और प्रशासन किसी भी नए खतरे से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर है।


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