
सोनीपत (हरियाणा)। हरियाणा के सोनीपत से सामने आई एक बेहद भावुक और दिल को झकझोर देने वाली घटना इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। बताया जा रहा है कि शहर के एक प्रसिद्ध कपड़ा व्यापारी ने अपने जीवन के अंतिम दिन वृद्धाश्रम में बिताए। उनके निधन के बाद भी उनकी तीनों बेटियां अंतिम संस्कार में शामिल होने नहीं पहुंचीं। सामाजिक संस्था की मदद से उनका अंतिम संस्कार कराया गया, जबकि बेटियों ने पूरी प्रक्रिया वीडियो कॉल के माध्यम से देखी।जानकारी के अनुसार, दिवंगत व्यापारी कभी सोनीपत के जाने-माने कपड़ा कारोबारियों में गिने जाते थे। समय के साथ पारिवारिक परिस्थितियां बदलीं और बताया जाता है कि वह वृद्धाश्रम में रहने लगे। वृद्धाश्रम के कर्मचारियों का कहना है कि वह अक्सर अपनी बेटियों का जिक्र करते थे और उनसे मिलने की इच्छा व्यक्त करते थे। हालांकि, इस संबंध में परिवार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।बताया जा रहा है कि कुछ समय से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। उपचार के दौरान वृद्धाश्रम में ही उनका निधन हो गया। निधन के बाद अंतिम संस्कार की व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी, जिसके बाद एक सामाजिक संस्था आगे आई और पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी संभाली।
“VIDEO कॉल पर हुई अंतिम विदाई”
मामले में बताया गया कि व्यापारी की बड़ी बेटी अनिता से संपर्क किया गया। उन्होंने ऑनलाइन 5,100 रुपये भेजे और संस्था से अनुरोध किया कि उनके पिता का अंतिम संस्कार पूरे विधि-विधान से कराया जाए। इसके बाद अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया वीडियो कॉल के माध्यम से बेटियों को दिखाई गई। उन्होंने इसी माध्यम से अपने पिता को अंतिम विदाई दी।
“अस्थियां लेने पर मिला जवाब—”देखते हैं”
अंतिम संस्कार संपन्न होने के बाद संस्था की ओर से बेटियों से पूछा गया कि वे अपने पिता की अस्थियां लेने कब आएंगी। जानकारी के अनुसार, जवाब मिला—”देखते हैं।” फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि बाद में वे अस्थियां लेने पहुंचीं या नहीं।
“सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस”
यह घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोग इसे बदलते पारिवारिक रिश्तों और बुजुर्गों के अकेलेपन का दर्दनाक उदाहरण बता रहे हैं। वहीं कई लोगों का कहना है कि बिना पूरी जानकारी के बेटियों को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, क्योंकि उनके अंतिम संस्कार में शामिल न होने के पीछे व्यक्तिगत, स्वास्थ्य, आर्थिक या अन्य गंभीर कारण भी हो सकते हैं।सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली और व्यस्तता के दौर में परिवारों के बीच भावनात्मक दूरी बढ़ती जा रही है। माता-पिता को केवल आर्थिक सहयोग ही नहीं, बल्कि समय, अपनापन और साथ की भी आवश्यकता होती है। वहीं कई बार परिस्थितियां ऐसी भी होती हैं, जिनमें परिजन चाहकर भी समय पर नहीं पहुंच पाते। इसलिए किसी भी घटना पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले सभी पक्षों को सुनना आवश्यक है।
