
बिहार के बांकीपुर, मध्य प्रदेश के दतिया और गुजरात के मंझलपुर विधानसभा उपचुनावों की मतगणना जारी है. सबसे ज्यादा नजर बांकिपुर पर है, जहां जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पहली बार चुनावी मैदान में अपनी राजनीतिक ताकत का इम्तिहान दे रहे हैं.
बिहार के बांकीपुर, मध्य प्रदेश के दतिया और गुजरात के मंझलपुर विधानसभा उपचुनावों की मतगणना जारी है. भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के रुझानों के अनुसार, जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर बांकीपुर में 5,000 से ज्यादा वोटों से आगे चल रहे हैं. ये उनका पहला चुनाव है. उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी, बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा पीछे चल रहे हैं. बिहार के बांकीपुर के अलावा, मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए वोटों की गिनती भी चल रही है.बांकीपुर सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है. ये सीट पूर्व विधायक नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद से खाली है. इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा है, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) भी पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ रहा है. ऐसे में यहां मुकाबला त्रिकोणीय बन गया है. 30 जुलाई को हुए मतदान के बाद अब सभी की निगाहें मतगणना पर टिकी हैं.
“प्रशांत किशोर की अग्नि परीक्षा”
ये चुनाव केवल एक सीट का परिणाम नहीं बल्कि प्रशांत किशोर की नई राजनीतिक पार्टी की स्वीकार्यता का भी बड़ा संकेत माना जा रहा है. अगर उन्हें सकारात्मक परिणाम मिलता है तो बिहार की राजनीति में जन सुराज पार्टी की भूमिका और मजबूत हो सकती है. वहीं, बीजेपी और आरजेडी के लिए भी यह चुनाव प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है.
“दतिया विधानसभा सीट”
वहीं, मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर भी मुकाबला काफी रोचक है. यहां बीजेपी ने अशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया है. इस सीट पर 71 प्रतिशत से ज्यादा मतदान दर्ज किया गया था, जिससे साफ है कि मतदाताओं ने चुनाव में अच्छी भागीदारी दिखाई.
“मंझलपुर विधानसभा सीट”
उधर, गुजरात की मंझलपुर विधानसभा सीट पर भी मतगणना जारी है. ये सीट बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री योगेश पटेल के निधन के बाद खाली हुई थी. बीजेपी ने यहां सतीश गोविंदभाई पटेल को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने पूर्व मंत्री भिखाभाई रबारी को मैदान में उतारा है. हालांकि यहां मतदान प्रतिशत अन्य दोनों सीटों की तुलना में कम रहा, लेकिन परिणाम राज्य की राजनीतिक तस्वीर को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं.
