
मिस्र के एक पुरातात्विक स्थल पर खुदाई के दौरान टॉलेमिक और रोमन काल का करीब 2,000 साल पुराना विशाल स्नानागार मिला है. कई और ऐतिहासिक अवशेष भी मिले. प्राचीन इंजीनियरिंग की शानदार मिसाल. प्राचीन स्नानागार ने खोले इतिहास के नए राज.
मिस्र में पुरातत्वविदों को एक ऐसी खोज मिली है, जिसने इतिहास के कई पुराने पन्ने फिर से खोल दिए हैं. देश के पूर्वी नील डेल्टा क्षेत्र में स्थित टेल नासेर पुरातात्विक स्थल पर खुदाई के दौरान करीब 2,000 साल पुराना एक विशाल स्नानागार (बाथ कॉम्प्लेक्स) मिला है. खास बात यह है कि यह इस क्षेत्र में पूरी तरह दर्ज किया गया पहला ऐसा स्नानागार है. यह स्थल पोर्ट सईद शहर से लगभग 40 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस खोज से टॉलेमिक और रोमन काल के लोगों की जीवनशैली, उनकी तकनीक और सार्वजनिक सुविधाओं के बारे में नई जानकारी मिलेगी. खुदाई के दौरान ऐसे प्रमाण भी मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि यहां स्नानागार बनने से पहले भी लोग रहते थे.

“खुदाई में मिला सालों पुराना स्नानागार”
पुरातत्वविदों के अनुसार, यह स्नानागार पहली शताब्दी ईसा पूर्व के अंत में बनाया गया था, और दूसरी शताब्दी ईस्वी तक इसका उपयोग होता रहा. इस परिसर की सबसे खास बात यह है कि इसमें आम लोगों के लिए सार्वजनिक स्नानागार और खास लोगों के लिए अलग निजी स्नान की व्यवस्था थी. दोनों हिस्सों को पानी की आपूर्ति और निकासी की आधुनिक प्रणाली से जोड़ा गया था. निजी स्नानागार में लगभग 2.5 मीटर चौड़ा गोलाकार स्नान कुंड मिला है, जिसकी दीवारें लाल ईंटों से बनी हैं और उन पर गुलाबी रंग का जलरोधी प्लास्टर चढ़ाया गया है. इसके अलावा दो अंडाकार फुट बाथ, लंबी जल निकासी नालियां और पानी गर्म करने से जुड़ा एक ढांचा भी मिला है. यह बताता है कि उस समय के लोग साफ-सफाई और आराम का विशेष ध्यान रखते थे.
“बेहतरीन जल निकासी व्यवस्था”
बताया जा रहा है कि सार्वजनिक स्नानागार में दो बड़े गोलाकार कक्ष मिले हैं, जिन्हें थोलोई कहा जाता है. इनमें से एक कक्ष में पांच फुट बाथ यूनिट मिली हैं, जिनमें से तीन आज भी अच्छी स्थिति में हैं. इन सीटों में पीठ टिकाने की जगह, हाथ रखने के सहारे और पैरों के लिए गोलाकार स्थान बनाया गया था. इसके अलावा यहां पानी जमा करने और बांटने के लिए अलग कुंड, फिसलन रोकने वाला विशेष फर्श और सीवर से जुड़ी जल निकासी प्रणाली भी मिली है. खुदाई के दौरान लगभग छह मीटर लंबी ऊंची ईंटों की पानी की नहर भी मिली, जिसके ऊपर मेहराबनुमा छत बनी हुई थी. इसके नीचे और भी पुरानी जल लाइन और मकानों के अवशेष मिले हैं. इससे पता चलता है कि इस इलाके में समय-समय पर कई बार निर्माण कार्य हुए और बस्ती लगातार विकसित होती रही.
“इतिहास के नए राज खुले”
खुदाई में कई महत्वपूर्ण पुरावशेष भी मिले हैं. इनमें यूनानी नामों वाली रोडियन एम्फोरा मुहरें, साइप्रस से आए मिट्टी के बर्तन, ग्रीक एम्फोरा, तेल के दीये, प्लेटें, कटोरियां, जग और अन्य स्थानीय व आयातित बर्तन शामिल हैं. इन वस्तुओं की मदद से वैज्ञानिकों ने अलग-अलग समय की परतों की पहचान की और यह समझा कि यहां कई सदियों तक लोग रहते रहे. विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज न केवल प्राचीन मिस्र, बल्कि टॉलेमिक और रोमन काल के सामाजिक जीवन, व्यापार और इंजीनियरिंग तकनीक को समझने में भी बेहद अहम साबित होगी.

“कई और अनछुए रहस्य आने की संभावना”
आने वाले समय में इस स्थल पर और खुदाई होने की संभावना है, जिससे इतिहास के और भी कई अनछुए रहस्य सामने आ सकते हैं. यह जानकारी आर्कियोलॉजी मैगज़ीन में प्रकाशित रिपोर्ट और मिस्र के मिनिस्ट्री ऑफ टूरिज्म एंड एंटीक्विज द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर आधारित है.
