
वाराणसी (स्पीक द वर्ल्ड)। कार्यरत शिक्षकों को पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की पहल के बीच 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हो चुके शिक्षकों ने भी स्वास्थ्य सुरक्षा की मांग उठाई है। उनका कहना है कि लंबे समय तक शिक्षा के क्षेत्र में सेवा देने के बाद सेवानिवृत्ति के पश्चात बढ़ती उम्र में इलाज का खर्च बड़ी चिंता बन जाता है।अवकाश प्राप्त शिक्षक एवं पूर्व एनसीसी अधिकारी डॉ. (मेजर) अरविंद कुमार सिंह ने प्रदेश सरकार से मानवीय आधार पर इस विषय पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि 62 से 70 वर्ष की आयु के बीच के सेवानिवृत्त शिक्षक वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों को मिलने वाली सुविधा और 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए उपलब्ध स्वास्थ्य सुरक्षा के बीच अलग स्थिति में हैं।उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद इस आयु वर्ग में नियमित जांच और उपचार की जरूरत बढ़ जाती है। हृदय, आंख, हड्डियों, जोड़ों, मधुमेह और रक्तचाप जैसी समस्याओं के उपचार में काफी खर्च हो सकता है। ऐसे में पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा से सेवानिवृत्त शिक्षकों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है।डॉ. सिंह ने सरकार से 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त शिक्षकों को भी ऐसी स्वास्थ्य सुविधा के दायरे में शामिल करने पर विचार करने का आग्रह किया है।
