शहीदों के बलिदान से मिली आजादी, इसे चरित्र निर्माण से सुरक्षित रखने की जरूरत

Share News

वाराणसी। स्वतंत्रता असंख्य ज्ञात-अज्ञात बलिदानियों के त्याग और संघर्ष का परिणाम है। इसे आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए युवाओं में चरित्र निर्माण, राष्ट्र प्रथम की भावना और जिम्मेदारी का संस्कार विकसित करना आवश्यक है। यह विचार सोमवार को बाबू जगत सिंह शोध समिति की ओर से जगतगंज स्थित बाबू जगत सिंह कोठी में आयोजित ‘एक शाम शहीदों के नाम’ कार्यक्रम में व्यक्त किए गए। साहित्यकार डॉ. राम सुधार सिंह ने कहा कि भगत सिंह की डायरी स्वतंत्रता के इतिहास का महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

महाराज चेत सिंह का विद्रोह काशी से शुरू हुआ और 1799 का काशी विद्रोह भी यहां की संघर्ष परंपरा का प्रमाण है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में पत्रकारिता की भूमिका बताते हुए कहा कि पराड़कर जी के समाचार पत्र ‘रणभेरी’ पर प्रतिबंध के बावजूद लोग उसे अपनी पीठ पर चिपकाकर दीवारों तक ले जाते और स्वतंत्रता की आवाज घर-घर पहुंचाते थे। उन्होंने कहा कि चरित्र निर्माण के अभाव में स्वतंत्रता की रक्षा कठिन होगी।

डॉ. (मेजर) अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि आजादी अनेक ज्ञात-अज्ञात बलिदानियों की कुर्बानी से मिली है। स्वतंत्रता को अक्षुण्ण रखते हुए अगली पीढ़ी को सौंपना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना देश के लिए योगदान की प्रेरणा देती है। कार्यक्रम का शुभारंभ रंजना राय, शिरोमणि, योगेश श्रीवास्तव व अर्क पांडे के देशभक्ति गीतों से हुआ। संचालन अशोक आनंद ने किया।

संरक्षक प्रदीप नारायण सिंह ने आभार जताया। डॉ. बीबी सिंह, सलीम राजा, श्यामल वर्मा, विकास यादव, शमीम, रामानंद दीक्षित, सत्येंद्र बहादुर सिंह, केदारनाथ सिंह, शक्ति सिंह, गौरव मिश्रा व संयोजक अरविंद सिंह (अधिवक्ता) मौजूद रहे।


Share News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *