
वाराणसी (स्पीक द वर्ल्ड)। सीएसआईआर, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पीके सिंह ने कहा कि आनुवंशिक रूप से संशोधित कपास, कीट-प्रतिरोधी फसलों और कृषि क्षेत्र में चल रहे नवीन शोध को समझना विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिक शोध का उद्देश्य केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके माध्यम से कृषि और ग्रामीण क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं के समाधान की दिशा में कार्य होना चाहिए। वह गुरुवार को उदय प्रताप स्वायत्तशासी महाविद्यालय में उन्नत भारत अभियान के अंतर्गत आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने आनुवंशिक रूप से संशोधित कपास, कीट-प्रतिरोधी फसलों तथा इस क्षेत्र में चल रहे नवीन शोध के विभिन्न वैज्ञानिक पहलुओं को सरल, रोचक एवं संवादात्मक शैली में समझाया। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए कई प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. सिंह ने वैज्ञानिक एवं तार्किक ढंग से समाधान किया। डॉ. पुष्पराज शिवहरे ने कृषि, पशुपालन एवं ग्रामीण विकास के पारस्परिक संबंधों पर विचार रखे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती की उपयोगिता बताते हुए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य, पर्यावरणीय संतुलन एवं सतत कृषि के महत्व पर प्रकाश डाला।प्राचार्य प्रो. डीके सिंह ने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ समाज एवं ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़कर कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और शोध का उद्देश्य समाज की समस्याओं को समझकर उनके समाधान की दिशा में प्रयास करना है। उन्होंने बताया कि उन्नत भारत अभियान के अंतर्गत महाविद्यालय को पुनः परियोजना मिली है। इसमें पांच गांवों को शामिल किया गया है। विद्यार्थी इन गांवों में जाकर स्थानीय परिस्थितियों, समस्याओं एवं आवश्यकताओं का अध्ययन करते हुए सर्वेक्षण और शोध करेंगे। शुभारंभ डॉ. एसके श्रीवास्तव ने अतिथियों, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों के स्वागत से किया। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन कर महाविद्यालय के संस्थापक एवं प्रेरणास्रोत राजर्षि उदय प्रताप सिंह को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित की गई। प्रो. तुमुल सिंह ने मुख्य वक्ता डॉ. पीके सिंह का परिचय कराया। मुख्य वक्ता को सम्मान-चिह्न एवं अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. सुधीर कुमार राय ने किया। इस अवसर पर प्राचार्य प्रो. डीके सिंह, प्रो. एनपी सिंह, प्रो. एसके द्विवेदी, प्रो. सुधीर राय, विभागाध्यक्ष प्रो. तुमुल सिंह, डॉ. एसके श्रीवास्तव, डॉ. बीके सिन्हा, डॉ. पुष्पराज शिवहरे, डॉ. जितेंद्र सिंह, डॉ. दीपक कुमार सिंह, डॉ. अंकित कुमार सिंह, डॉ. शिवराज वर्मा, डॉ. ए.के. निगम, सहायक प्रोफेसर सतीश प्रताप सिंह, विनय प्रताप एवं प्रीति यादव सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं विद्यार्थी।
