
वाराणसी (स्पीक द वर्ल्ड)। केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान,सारनाथ के राजभाषा कार्यान्वयन समिति द्वारा आयोजित राजभाषा सप्ताह समारोह का उद्घाटन अतिश सभागार में किया गया।विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए व्योमेश शुक्ल (प्रधानमंत्री, नागरी प्रचारिणी सभा) ने कहा कि हिंदी एक समावेशी भाषा है जिसमें सब कुछ समेट लेने की क्षमता है।जो भाषा जितनी विनम्रशील होगी वहीं मजबूत बनेगी। हिंदी में यह स्वभाव सांस्कृतिक रूप से सदैव रहा है। उन्होंने कहा कि जब-तक हमारी भाषा ज्ञान मिमांसा की जब तक यह अपने मूल रुप से दूर रहेगी। हिंदी अपनी परम्परा से प्राणशक्ति लेने के कारण हिंदी आज अपने उच्चतम स्वरुप में पहुंची है। भारतेन्दु हरिश्चंद्र से लेकर महात्मा गांधी तक ने माना कि देश को एक सूत्र में पिरोने के लिए एक जनभाषा चाहिए। गांधी जी ने कहा था-“हिंदी ही वह भाषा है जो पूरे देश को एक छत के नीचे ला सकती है।” 1918 के हिंदी साहित्य सम्मेलन में उन्होंने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का प्रस्ताव रखा, ताकि बंगाल से लेकर पंजाब और महाराष्ट्र तक स्वतंत्रता का संदेश एक ही भाषा में पहुँचे।
मुख्य अतिथि आई.एम.एस. बीएचयू के निदेशक प्रोफेसर एस. एन. गंगवार ने कहा कि आज इंटरनेट पर हिंदी सबसे तेजी से बढ़ने वाली भाषा है। गूगल, यूट्यूब, व्हाट्सएप पर हिंदी सामग्री ने गांव और शहर, शिक्षित और कम-शिक्षित के बीच की डिजिटल खाई को पाटा है।
अध्यक्षता करते हुए संस्थान के कुलपति प्रो वांगचुक दोर्जे नेगी* ने कहा कि हम अपनी भाषा से जितना प्रेम करेंगे उतनी ही भाषा मजबूत बनेगी। भाषा भाव की विषयवस्तु है।वह हमारी मां है। हिंदी ने भारत को केवल शब्द नहीं दिए, उसने हमें एक साझा पहचान दी है। यह काशी के घाट की आरती से लेकर लाल किले के भाषण तक, एक ही भाव को व्यक्त करती है-हम सब भारतीय हैं। विषय प्रवर्तन डॉ उमेश प्रसाद सिंह ने तथा संचालन डॉ अनुराग त्रिपाठी ने किया। स्वागत उपकुलसचिव डॉ हिमांशु पाण्डेय तथा धन्यवाद ज्ञापन संस्थान के मीडिया प्रभारी डॉ सुशील कुमार सिंह ने किया।
इस अवसर पर प्रो.रामसुधार सिंह, राजेश मिश्र, सुनिल कुमार, डॉ.रविरंजन द्विवेदी, टी.आर.शाशनी, डॉ जम्पा सामतेन सहित संस्थान के अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
