
वाराणसी। उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती पर गुरुवार को उनके पैतृक गांव लमही स्थित प्रेमचंद स्मारक परिसर में दो दिवसीय प्रेमचंद उत्सव का शुभारंभ हुआ। प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र (ट्रस्ट) की ओर से आयोजित कार्यक्रम में साहित्यकारों, रंगकर्मियों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और साहित्य प्रेमियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रेमचंद की प्रतिमा की साफ-सफाई से हुई। इसके बाद उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। डॉ. मंजरी पांडेय ने शिवरानी देवी की भूमिका में प्रेमचंद को लिखी पाती का भावपूर्ण वाचन किया, जबकि दिनेश श्रीवास्तव ने मुंशी प्रेमचंद का रूप धारण कर उनके जीवन और साहित्य पर प्रभावशाली प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।उत्सव में प्रेरणा कला मंच द्वारा प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी ‘ठाकुर का कुआँ’ तथा कामायनी वाराणसी की ओर से ‘शोक का पुरस्कार’ का सशक्त नाट्य मंचन किया गया। दोनों प्रस्तुतियों ने सामाजिक विषमता, मानवीय संवेदनाओं और प्रेमचंद के यथार्थवादी साहित्य को जीवंत कर दिया। दर्शकों ने कलाकारों का तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया।

मुख्य वक्ता प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी सामाजिक न्याय, समानता और मानवीय मूल्यों का सबसे प्रासंगिक दस्तावेज है। कार्यक्रम का संचालन आयुषी ने किया। विभिन्न प्रतियोगिताओं के प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। अंत में ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रो. श्रद्धानंद ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
