भारतीय संस्कृति में गुरु केवल शिक्षक नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण के आधार

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वाराणसी। उदय प्रताप महाविद्यालय के राजर्षि सेमिनार हाल में गुरुवार को राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में गुरुवंदन एवं कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित हुआ। सम्मेलन में शिक्षा जगत से जुड़े शिक्षकों और पदाधिकारियों ने भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा तथा शिक्षा के सांस्कृतिक मूल्यों पर विचार व्यक्त किए। मुख्य वक्ता अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री जी. लक्ष्मण ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु केवल शिक्षक नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण के आधार हैं। माता-पिता जीवन देते हैं, जबकि गुरु ज्ञान, संस्कार और आत्मविश्वास देकर व्यक्ति को समाज के प्रति उत्तरदायी बनाते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु के मार्गदर्शन से ही सही और गलत का विवेक विकसित होता है। महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (उच्च शिक्षा) प्रो. शैलेश कुमार ने कहा कि ‘गु’ का अर्थ अंधकार और ‘रु’ का अर्थ उसे दूर करने वाला है। गुरु अज्ञान का नाश कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं और जीवन के लक्ष्य तक पहुंचने की प्रेरणा देते हैं।

कार्यक्रम में विभिन्न राज्य विश्वविद्यालयों के शिक्षक एवं पदाधिकारी शामिल हुए। संचालन कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष प्रो. उदयन ने किया, जबकि प्रदेश अध्यक्ष (उच्च शिक्षा) प्रो. धर्मेंद्र सिंह ने आभार व्यक्त किया।


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