
वाराणसी। गिलट बाजार स्थित नवरचना कॉन्वेंट स्कूल में शनिवार को कर्मयोगी पीठ की ओर से काशी गीता चेतना अभियान का 38वां विश्राम आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता कर्मयोगी गौरव मिश्र ने विद्यार्थियों एवं उपस्थित लोगों को श्रीमद्भगवद्गीता के जीवनोपयोगी संदेशों से अवगत कराया।
उन्होंने कहा कि गीता केवल आध्यात्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला व्यवहारिक ज्ञान है। यह मनुष्य को कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करने, कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा और गीता के मूल्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि अभियान का उद्देश्य गीता के ज्ञान को समाज के विभिन्न वर्गों और विशेष रूप से नई पीढ़ी तक पहुंचाना है, ताकि विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन, कर्तव्यबोध और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित हो। उन्होंने गीता के संदेशों को जीवन और व्यवहार में उतारने का आह्वान किया। डॉ.( मेजर) अरविंद कुमार सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। संचालन शुभम जायसवाल ने किया। राजेश मिश्र, रंजना सिंह, शुभम पांडेय, किशन पटेल सहित कई लोग उपस्थित रहे। विद्यालय के संस्थापक एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामसुधार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को संस्कृति और जीवन-मूल्यों से जोड़ने में सहायक हैं। कार्यक्रम का समापन गीता के ज्ञान को जीवन में आत्मसात करने के संकल्प के साथ हुआ।
