
BRICS समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिंगपिंग की अहम द्विपक्षीय मुलाकात होने की संभावना है. 2020 गलवान झड़प के बाद दोनों नेताओं की यह पहली औपचारिक आमने-सामने बैठक होगी, ऐसे में सीमा और व्यापार पर नजर रहेगी.
दिल्ली (स्पीक द वर्ल्ड)। भारत और चीन के रिश्तों में लंबे समय से चली आ रही तल्खी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिंपिंग की मुलाकात पर सबकी नजरें टिक गई हैं. नई दिल्ली में होने वाले BRICS समिट के दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बातचीत होने की संभावना है. अगर यह बैठक होती है, तो 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद यह दोनों नेताओं की पहली औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता होगी.
शी जिनपिंग 12 सितंबर को नई दिल्ली पहुंचने वाले हैं. भारत इस बार 12 और 13 सितंबर को BRICS Leaders’ समिट की मेजबानी कर रहा है. Xi का भारत दौरा करीब सात साल बाद हो रहा है. हालांकि, दोनों देशों की ओर से अभी इस संभावित द्विपक्षीय बैठक की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है.जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों पर गहरा असर पड़ा था. इस संघर्ष में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे, जबकि चीन ने अपने चार सैनिकों की मौत की पुष्टि की थी. इसके बाद LAC पर लंबे समय तक सैन्य गतिरोध बना रहा. दोनों देशों के बीच राजनीतिक और राजनयिक संवाद भी प्रभावित हुआ. सीमा पर तनाव कम करने के लिए कई दौर की सैन्य और राजनयिक बातचीत हुई. हाल के वर्षों में कुछ विवादित क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी के बाद स्थिति में धीरे-धीरे स्थिरता आई है. हालांकि, सीमा विवाद अभी भी पूरी तरह सुलझा नहीं है.शी जिंगपिंग के भारत दौरे से पहले दोनों देशों के बीच राजनयिक संपर्क भी तेज हुआ है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने चीन की यात्रा कर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत की थी. इसके अलावा भारत-चीन सीमा मामले से जुड़े परामर्श और समन्वय के लिए कार्य-प्रणाली यानी WMCC की बैठक हुई. दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधि ने भी सीमा विवाद को लेकर बातचीत की. इन गतिविधियों को भारत और चीन के बीच संवाद बहाल करने तथा सीमा पर तनाव को नियंत्रित रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
“अरुणाचल प्रदेश फिर बनेगा अहम मुद्दा”
लद्दाख में तनाव कम होने के बावजूद भारत-चीन सीमा विवाद का दूसरा संवेदनशील क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश बना हुआ है. चीन पूरे अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है और इसे दक्षिणी तिब्बत बताता है. भारत ने इस दावे को लगातार खारिज किया है और साफ कहा है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न हिस्सा है.चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों के नाम बदलने की कोशिशों को भी भारत स्वीकार नहीं करता. नई दिल्ली का कहना है कि किसी भारतीय क्षेत्र का नाम बदलने से उसकी वास्तविक स्थिति या संप्रभुता नहीं बदल सकती. ऐसे में संभावित मोदी-Xi वार्ता में सीमा विवाद और LAC पर शांति बनाए रखना महत्वपूर्ण विषय हो सकता है.
“किन मुद्दों पर हो सकती है बात?”
दोनों नेताओं की बातचीत में सीमा सुरक्षा के अलावा व्यापार, निवेश, आर्थिक संबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे मुद्दे भी शामिल हो सकते हैं. भारत की कोशिश संभवतः ये होगी कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनी रहे, जबकि आर्थिक और राजनयिक सहयोग के उन क्षेत्रों को आगे बढ़ाया जाए जिनसे देश के रणनीतिक हित जुड़े हैं.
दूसरी ओर, चीन BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भारत के साथ सहयोग को मजबूत करने में रुचि दिखा सकता है. ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर अमेरिका की टैरिफ नीतियों और पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता का असर दिखाई दे रहा है, भारत-चीन संवाद का महत्व और बढ़ जाता है. अगर मोदी और Xi की मुलाकात होती है, तो ये केवल दो नेताओं की बैठक नहीं होगी, बल्कि गलवान के बाद दोनों देशों के रिश्तों में आई सावधानी भरी नरमी को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण संकेत भी मानी जा सकती है।
